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Videsh Yog: कुंडली में विदेश जाने और विदेश में बसने का योग, मुफ़्त जाँचें
जन्म विवरण डालिए। कैलकुलेटर बारहवें भाव (विदेश और दूर स्थान), नवम भाव (लंबी यात्रा), सप्तम भाव (व्यापारिक यात्रा), राहु और चंद्रमा की स्थिति देखकर बताता है कि आपकी कुंडली में विदेश यात्रा, विदेश में पढ़ाई या वहाँ बसने के कितने संकेत हैं।
कुंडली में विदेश योग कैसे बनता है
ज्योतिष में बारहवाँ भाव जन्मभूमि से दूर रहने का, नवम भाव लंबी यात्राओं का और सप्तम भाव व्यापार के लिए यात्रा का माना जाता है। राहु को विदेशी संस्कृति और विदेश से जुड़ा ग्रह माना जाता है। इन भावों और ग्रहों का संबंध विदेश योग बनाता है।
- बारहवें भाव का स्वामी नवम, सप्तम या लग्न में, या नवम का स्वामी बारहवें में
- राहु बारहवें, नवम, सप्तम या लग्न में
- चंद्रमा बारहवें या नवम भाव में: मन का दूर स्थानों की ओर झुकाव
- लग्न का स्वामी बारहवें भाव में: जन्मस्थान से दूर जीवन
- कई ग्रह चर राशियों (मेष, कर्क, तुला, मकर) में: यात्रा और बदलाव
विदेश यात्रा, पढ़ाई और बसना: फ़र्क़ समझें
छोटी विदेश यात्रा के लिए नवम या सप्तम भाव से संबंध काफ़ी हो सकता है, जबकि विदेश में लंबे समय तक बसने के लिए बारहवें भाव और उसके स्वामी का मज़बूत होना, और चौथे भाव (जन्मभूमि) से दूरी के संकेत ज़्यादा अहम माने जाते हैं। विदेश में पढ़ाई के लिए पंचम, नवम और बारहवें भाव का संबंध देखा जाता है।
विदेश जाने का समय
राहु, बारहवें भाव के स्वामी या नवम भाव के स्वामी की दशा-अंतर्दशा में विदेश यात्रा के योग अक्सर सक्रिय होते हैं। अपनी चल रही दशा महादशा कैलकुलेटर में देखें और वीज़ा या दाख़िले की योजना उसी हिसाब से बनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुंडली में विदेश योग कैसे देखें?
ऊपर दिए कैलकुलेटर में जन्म तिथि, समय और स्थान डालें। यह बारहवें, नवम और सप्तम भाव, राहु और चंद्रमा की स्थिति से विदेश योग के संकेत बताता है।
विदेश जाने के लिए कौन-सा ग्रह ज़िम्मेदार है?
राहु को मुख्य रूप से विदेश से जोड़ा जाता है, साथ में बारहवें और नवम भाव के स्वामी और चंद्रमा की भूमिका अहम है।
विदेश में बसने का योग कैसे पता चलता है?
बारहवें भाव और उसके स्वामी का मज़बूत होना, लग्न स्वामी का बारहवें भाव से संबंध और चौथे भाव (जन्मभूमि) पर पाप ग्रहों का प्रभाव विदेश में बसने के संकेत माने जाते हैं।
विदेश यात्रा कब होगी?
राहु, बारहवें या नवम भाव के स्वामी की दशा-अंतर्दशा और अनुकूल गोचर के समय विदेश यात्रा के योग सक्रिय माने जाते हैं।
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अपनी कुंडली पर अंकित दुबे जी से सीधी बात
अंकित दुबे जी कानपुर के वैदिक ज्योतिषी हैं: ICAS से ज्योतिष प्रवीण और ज्योतिष विशारद, आठ वर्षों से अधिक का अनुभव और 5,500 से अधिक परामर्श। उनका तरीका सरल है: कुंडली को डर या जल्दबाज़ी से नहीं, समझ के साथ देखना।
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