शनि की साढ़ेसाती
डर की नहीं, समझ की बात।
Sade Sati: आपकी राशि पर साढ़ेसाती कब से कब तक
अभी शनि मीन राशि में हैं। अपनी चंद्र राशि चुनें और देखें कि उस पर साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है या नहीं, कौन सा चरण है, और यह कब तक मानी जाती है।
आपकी चंद्र राशि कौन सी है?
साढ़ेसाती जन्म की चंद्र राशि से देखी जाती है, नाम के पहले अक्षर वाली राशि से नहीं। चंद्र राशि नहीं पता? निःशुल्क कुंडली से जानें।
अभी किस राशि पर साढ़ेसाती और ढैय्या है
| चंद्र राशि | अभी की स्थिति | अवधि |
|---|---|---|
| मेष (Mesh) | साढ़ेसाती का पहला चरण | मार्च २०२५ से मई २०३२ तक |
| वृषभ (Vrishabh) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: जून २०२७ से जुलाई २०३४ तक |
| मिथुन (Mithun) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: अगस्त २०२९ से अगस्त २०३६ तक |
| कर्क (Kark) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: मई २०३२ से जुलाई २०३९ तक |
| सिंह (Singh) | शनि की ढैय्या (आठवाँ भाव) | लगभग फ़रवरी २०२८ तक |
| कन्या (Kanya) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: अगस्त २०३६ से अगस्त २०४४ तक |
| तुला (Tula) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: अक्टूबर २०३८ से दिसंबर २०४६ तक |
| वृश्चिक (Vrishchik) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: जनवरी २०४१ से दिसंबर २०४९ तक |
| धनु (Dhanu) | शनि की ढैय्या (चौथा भाव) | लगभग फ़रवरी २०२८ तक |
| मकर (Makar) | अभी साढ़ेसाती नहीं | अगली: दिसंबर २०४६ से फ़रवरी २०५५ तक |
| कुंभ (Kumbh) | साढ़ेसाती का तीसरा चरण | जनवरी २०२० से फ़रवरी २०२८ तक |
| मीन (Meen) | साढ़ेसाती का दूसरा चरण | अप्रैल २०२२ से अप्रैल २०३० तक |
साढ़ेसाती के तीन चरण
- पहला चरण: पहले चरण में शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में होते हैं; इसे खर्च, भागदौड़ और नई ज़िम्मेदारियों की शुरुआत से जोड़ा जाता है।
- दूसरा चरण: दूसरे चरण में शनि चंद्र राशि पर ही होते हैं; इसे मन, सेहत और मेहनत पर सबसे अधिक ध्यान देने का समय माना जाता है।
- तीसरा चरण: तीसरे चरण में शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में होते हैं; इसे परिवार और धन की ज़िम्मेदारियों का, और धीरे-धीरे स्थिरता लौटने का चरण माना जाता है।
इन वर्षों में दिनचर्या, सेहत, ईमानदार मेहनत और बड़े फैसलों में धैर्य सबसे काम आते हैं। शनि को देर से, पर टिकाऊ परिणाम देने वाला माना जाता है।
शनि का गोचर: कब किस राशि में
| राशि | कब से | कब तक |
|---|---|---|
| कुंभ | अप्रैल २०२२ | जुलाई २०२२ |
| मकर | जुलाई २०२२ | जनवरी २०२३ |
| कुंभ | जनवरी २०२३ | मार्च २०२५ |
| मीन | मार्च २०२५ | जून २०२७ |
| मेष | जून २०२७ | अक्टूबर २०२७ |
| मीन | अक्टूबर २०२७ | फ़रवरी २०२८ |
| मेष | फ़रवरी २०२८ | अगस्त २०२९ |
| वृषभ | अगस्त २०२९ | अक्टूबर २०२९ |
| मेष | अक्टूबर २०२९ | अप्रैल २०३० |
| वृषभ | अप्रैल २०३० | मई २०३२ |
| मिथुन | मई २०३२ | जुलाई २०३४ |
| कर्क | जुलाई २०३४ | अगस्त २०३६ |
| सिंह | अगस्त २०३६ | अक्टूबर २०३८ |
लाहिड़ी अयनांश से गणना; जहाँ शनि वक्री होकर कुछ महीनों के लिए पिछली राशि में लौटते हैं, वह भी अलग पंक्ति में दिखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
साढ़ेसाती क्या है?
जब शनि आपकी जन्म की चंद्र राशि से बारहवीं, पहली (उसी) और दूसरी राशि से गुज़रते हैं, तो लगभग साढ़े सात वर्ष की इस अवधि को साढ़ेसाती कहते हैं। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहते हैं, इसलिए इसके तीन चरण होते हैं।
क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है?
नहीं। परंपरा में इसे ज़िम्मेदारी, धैर्य और मेहनत का समय माना जाता है। कई लोगों के जीवन में इसी समय स्थायी उपलब्धियाँ भी आती हैं। असर इस पर भी निर्भर करता है कि शनि आपकी कुंडली में कहाँ हैं और कौन सी दशा चल रही है।
ढैय्या क्या होती है?
जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में होते हैं, तो लगभग ढाई वर्ष की इस अवधि को ढैय्या (लघु कल्याणी) कहा जाता है। इसे भी काम और ज़िम्मेदारियों को व्यवस्थित रखने का समय माना जाता है।
नाम वाली राशि से देखें या चंद्र राशि से?
साढ़ेसाती जन्म की चंद्र राशि से देखी जाती है। नाम के पहले अक्षर से निकली राशि कई बार चंद्र राशि से अलग होती है। चंद्र राशि नहीं पता, तो निःशुल्क कुंडली में जन्म जानकारी भरकर जानें।
अलग-अलग जगह साढ़ेसाती की तारीखें अलग क्यों दिखती हैं?
शनि वक्री होकर कभी-कभी कुछ महीनों के लिए पिछली राशि में लौट आते हैं। कुछ पंचांग हर प्रवेश को अलग गिनते हैं; यहाँ, आम पंचांगों की तरह, ऐसी छोटी वापसी को एक ही साढ़ेसाती में जोड़ा गया है। गणना लाहिड़ी अयनांश से है और तारीखें महीने तक दी गई हैं।
साढ़ेसाती के साथ आपकी दशा
गोचर के साथ आपकी अपनी दशा भी मायने रखती है। अपनी महादशा देखें या निःशुल्क कुंडली में समय वाला सवाल चुनें; वहाँ साढ़ेसाती और दशा, दोनों साथ दिखते हैं।
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अंकित दुबे जी के बारे में
अंकित दुबे जी कानपुर के वैदिक ज्योतिषी हैं, आठ वर्षों से अधिक के अनुभव और ५,५०० से अधिक परामर्शों के साथ। उनका तरीका सरल है: कुंडली को डर या जल्दबाज़ी से नहीं, समझ के साथ देखना। उनके बारे में और पढ़ें।