27 नक्षत्र · Punarvasu Nakshatra · 7वाँ नक्षत्र
पुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी, देवता, गण, नाम अक्षर और स्वभाव
लौटकर आने और फिर से बनने का नक्षत्र; इसके जातक आशावादी, संतोषी और परिवार-प्रेमी माने जाते हैं।
पुनर्वसु नक्षत्र और कुंडली मिलान
कुंडली मिलान के 36 गुणों में तारा, योनि, गण और नाड़ी (21 अंक) जन्म नक्षत्र से गिने जाते हैं। पुनर्वसु वालों की नाड़ी आदि है; साथी की नाड़ी भी यही हो तो नाड़ी कूट में अंक नहीं मिलते, हालाँकि इसके परंपरागत अपवाद भी हैं। निःशुल्क कुंडली मिलान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं। इस नक्षत्र में जन्म हो तो विंशोत्तरी दशा गुरु की महादशा से शुरू होती है (कुल 16 वर्ष, जिसमें से बची अवधि जन्म के अंश से तय होती है)।
पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
परंपरा में पुनर्वसु के चार चरणों के अक्षर चरण 1: के, चरण 2: को, चरण 3: हा, चरण 4: ही हैं। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हो, उसका अक्षर शुभ माना जाता है।
पुनर्वसु नक्षत्र का गण और नाड़ी क्या है?
पुनर्वसु का गण देव, नाड़ी आदि और योनि मार्जार है। कुंडली मिलान में गण, नाड़ी और योनि कूट इन्हीं से गिने जाते हैं।
मेरा जन्म नक्षत्र कौन सा है, कैसे पता करें?
जन्म तिथि, समय और स्थान से जन्म के समय चंद्रमा का नक्षत्र निकलता है। नक्षत्र कैलकुलेटर या निःशुल्क कुंडली में जानकारी भरकर तुरंत जानें।
अपनी कुंडली पर अंकित दुबे जी से सीधी बात
अंकित दुबे जी कानपुर के वैदिक ज्योतिषी हैं: ICAS से ज्योतिष प्रवीण और ज्योतिष विशारद, आठ वर्षों से अधिक का अनुभव और 5,500 से अधिक परामर्श। उनका तरीका सरल है: कुंडली को डर या जल्दबाज़ी से नहीं, समझ के साथ देखना।
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