3 जुलाई 2026 का पंचांग · गोरखपुर

गोरखपुर का आज का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त

3 जुलाई 2026, शुक्रवार को गोरखपुर में सूर्योदय के समय कृष्ण तृतीया तिथि और श्रवण नक्षत्र है। सूर्योदय सुबह 5:07, सूर्यास्त शाम 6:54।

पंचांग · 3 जुलाई 2026 · गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
तिथिकृष्ण तृतीया (सुबह 11:21 तक), फिर कृष्ण चतुर्थी (अगले दिन दोपहर 12:40 तक)
नक्षत्रश्रवण (सुबह 11:47 तक), फिर धनिष्ठा (अगले दिन दोपहर 1:44 तक)
योगविष्कुंभ (शाम 5:00 तक), फिर प्रीति (अगले दिन शाम 5:02 तक)
करणविष्टि (भद्रा) (सुबह 11:21 तक), फिर बव (अगले दिन रात 12:04 तक), फिर बालव (अगले दिन दोपहर 12:40 तक)
वारशुक्रवार
पक्षकृष्ण पक्ष
मासआषाढ़ (पूर्णिमांत) · ज्येष्ठ (अमांत)
चंद्र राशिमकर, अगले दिन रात 12:49 से कुंभ
  • सूर्योदयसुबह 5:07
  • सूर्यास्तशाम 6:54
  • अभिजित मुहूर्तसुबह 11:33 – दोपहर 12:28
  • राहुकालसुबह 10:17 – दोपहर 12:01
  • यमगंडदोपहर 3:27 – शाम 5:11
  • गुलिक कालसुबह 6:51 – सुबह 8:34

सूर्योदय के आधार पर (उदया तिथि), गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के सूर्योदय-सूर्यास्त से, भारतीय समय (IST) में। लाहिड़ी अयनांश।

अंकित जी की सलाह

पंचांग दिन का स्वभाव बताता है, दिन को अच्छा या बुरा नहीं बनाता। राहुकाल में रोज़मर्रा के काम चलते रहते हैं; किसी बड़े नए काम की शुरुआत के लिए अभिजित मुहूर्त या शुभ तिथि चुनना परंपरा में अच्छा माना जाता है। सही समय के साथ मन की तैयारी भी उतनी ही ज़रूरी है।

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि है; एक मास में 30 तिथियाँ, दो पक्षों में।
  • वार: सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का दिन।
  • नक्षत्र: चंद्रमा जिस 27वें हिस्से में हो। अपना जन्म नक्षत्र जानें।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा के अंशों के योग से बनने वाले 27 योग।
  • करण: तिथि का आधा भाग; एक तिथि में दो करण।

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर, वार के अनुसार एक-एक भाग इन्हें दिया जाता है। परंपरा में इन समयों में नए काम की शुरुआत टाली जाती है; रोज़मर्रा के काम इनसे रुकते नहीं। अभिजित मुहूर्त दिन के बीच का शुभ समय माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचांग में दिन की तिथि कैसे तय होती है?

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही पूरे दिन की तिथि मानी जाती है (उदया तिथि)। दिन में तिथि बदल जाए, तो उसका समय भी यहाँ दिया जाता है।

राहुकाल क्या है और यह रोज़ अलग क्यों होता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है; वार के अनुसार उनमें से एक हिस्सा राहुकाल कहलाता है। परंपरा में नए काम की शुरुआत के लिए इसे टाला जाता है। सूर्योदय-सूर्यास्त रोज़ और हर शहर में बदलते हैं, इसलिए राहुकाल का समय भी बदलता है।

अभिजित मुहूर्त क्या है?

दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, यानी दोपहर के बीच का मुहूर्त, अभिजित कहलाता है और परंपरा में शुभ माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लिया जाता।

पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या अंतर है?

उत्तर भारत में पूर्णिमांत (पूर्णिमा पर खत्म होने वाला) मास चलता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में अमांत (अमावस्या पर खत्म होने वाला)। शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक रहता है, कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत मास एक आगे होता है। यहाँ दोनों दिए गए हैं।

अलग शहर में पंचांग अलग क्यों होता है?

तिथि और नक्षत्र पूरे देश में एक ही क्षण बदलते हैं, पर सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है। इसलिए किसी शहर में सूर्योदय के समय दूसरी तिथि चल रही हो सकती है, और राहुकाल व मुहूर्त के समय भी बदलते हैं। ऊपर अपना शहर चुनें।

भद्रा (विष्टि करण) क्या है?

करण तिथि का आधा भाग है। सात चर करणों में विष्टि को भद्रा कहते हैं, और परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए इसे टाला जाता है। आज के करण ऊपर समय के साथ दिए गए हैं।

आज का राशिफल भी देखें

आज चंद्रमा मकर राशि में हैं। आपकी चंद्र राशि पर इसका क्या असर माना जाता है, यह आज के राशिफल में देखें।

अपनी कुंडली पर अंकित दुबे जी से सीधी बात

अंकित दुबे जी कानपुर के वैदिक ज्योतिषी हैं: ICAS से ज्योतिष प्रवीण और ज्योतिष विशारद, आठ वर्षों से अधिक का अनुभव और 5,500 से अधिक परामर्श। उनका तरीका सरल है: कुंडली को डर या जल्दबाज़ी से नहीं, समझ के साथ देखना।

  • ₹499 में 18 मिनट, ₹799 में 27 मिनट: तय शुल्क, कोई प्रति-मिनट मीटर नहीं
  • निजी ऑनलाइन बातचीत, आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा के साथ

दूसरे शहरों का आज का पंचांग

दूसरे निःशुल्क ज्योतिष टूल